Friday, 23 December 2011

ऐसे करें तो पलभर में टाइपिंग की थकान हो जाएगी उडऩ-छू

वर्तमान समय में सभी कामों के लिए कम्प्यूटर का उपयोग किया जाता है। ऐसे में कामकाजी लोगों को लगातार कई घंटों तक कम्प्यूटर पर कार्य करना पड़ता है।कम्प्यूटर पर वर्किंग करते समय सबसे अधिक अंगुलियों को कार्य करना पड़ता है। ऐसे में स्वाभाविक है कि वे थक सकती हैं और दर्द भी करें। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो ऑफिस में या अन्य किसी भी स्थान पर कम्प्यूटर वर्किंग करते समय ही एक छोटी एक्सरसाइज करें तो आपकी अंगुलियों का तनाव समाप्त हो जाएगा और आप अपना कार्य अच्छे से कर सकेंगे।

एक्सरसाइज की विधि- चेयर पर बैठे-बैठे ही अपने हाथों को सामने की ओर कंधे के बराबर ले आएं। दोनों हथेली को नीचे की ओर रखते हुए मुठ्ठी बना लें। ध्यान रहे अंगूठा अंदर की ओर रखें। अब दोनों हथेलियों को घुमाइएं। दोनों हथेलियों को दोनों दिशाओं में बारी-बारी से घुमाएं। सांस सामान्य रखें।यह अभ्यास पांच-पांच मिनिट तक दिन में कई बार कर सकते हैं। इससे अंगुलियों और हाथों को तनाव खत्म हो जाएगा।

सर्दी में जोड़ों के दर्द को कहें अलविदा सिर्फ चंद मिनटों में

जोड़ों में दर्द के अनेक कारण हो सकते हैं जाड़े के मौसम में जैसे-जैसे तापमान में कमी होती है, किसी जोड़ विशेष में रक्त वाहिनियों के संकुचित होने से उस हिस्से में रक्त का तापमान कम हो जाता है जिससे जोड़ में अकड़ाहट बढ़ती है तथा दर्द होने लगता है।

जबकि कई बार रक्त धमनियों की दीवार के तनाव में कमी आती है, जिस कारण धमनियां फैल जाती हैं तथा दर्द और सूजन बढ़ जाते हैं। इसके अलावा सर्दियों में बढ़ी हुई हयूमिडिटी के कारण तंत्रिकाओं में संवेदना की क्षमता निश्चित रूप से बढ़ जाती है।

जिससे जोड़ों में दर्द अधिक महसूस होता है जबकि गर्मियों में इसके उल्टे सिद्धान्त के कारण दर्द कम महसूस होता है। अगर आपको भी ठंड में जोड़ों का दर्द सता रहा है तो नीचे लिखे आसन को रोज कुछ मिनट करें शीघ्र ही जोड़ों के दर्द हो जाएगा ठीक। 

गृद्धासन की विधि



- समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर जमीन पर सीधा खड़े हो जाएं।



- फिर दाएं पैर को घुटनें से मोड़कर बाएं पैर में रस्सी की तरह लपेटकर खड़े हो जाएं तथा पूरे शरीर का भार एक पैर पर डालें।



- इस तरह दोनों हाथों को भी आपस में इस तरह से लपेटे की अंगुलियां गिद्ध की चोंच की तरह बन जाएं।



- हाथों को मुंह के सामने रखें।



- आसन की इस स्थिति में कुछ देर तक रहें और सामान्य स्थिति में आकर इस क्रिया को दूसरे पैरों से भी करें।



- इसमें घुटनों को हमेशा मुड़े हुए रखें। इस आसन का अभ्यास शुरु में कठिन होता है।



- इस आसन को शुरु में करते समय किसी दूसरे की सहायता ले सकते हैं। बाद में बिना किसी की सहायता से ही करें। इस आसन में शरीर का पूर्ण भार एक पैर पर ही टिका होता है। इसमें शरीर का संतुलन बनाना आवश्यक है।



आसन से रोगों में लाभ



इससे पिण्डलियों की मांसपेशियां विकसित व सख्त बनती है। इस से पैरों व हाथों की हड्डियां मजबूत होती है तथा रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है। यह हाथ-पैरों को विकसित एवं पुष्ट करता है। यह गठिया तथा पुरानी वातरोग, साइटिका पेन को ठीक करता हैं।

ठंड में फिटनेस बनाए रखने के लिए अपनाएं ये आसान तरीका

यदि आप ठण्ड में देर से उठने के आदि हैं और ठण्ड के मारे टहलने से परहेज करते हैं, तो आप हो जाएँ सावधान ! आयुर्वेद के अनुसार  इस ऋतु में अग्नि का बल अपने चरम पर होता है, जिस कारण लोग अधिक भारी और चर्बी युक्त भोजन कर लेते हैं ,और क्रिसमस  की पार्टीयों के खान-पान का तो कहना ही क्या? पर वैज्ञानिकों के मानें तो इस ऋतु में भी रात के भोजन के बाद टहलना आपके लिए फायदेमंद होगा। हाल ही में हुए एक अध्ययन में युनिवर्सिटी आफ ग्लासगो के शोधकर्ताओं मानना है, कि यदि आप ठण्ड में अत्यधिक वसा से युक्त भोजन कर लेते हैं, तो इसका प्रभाव आपके वजन को बढ़ा देता है। 

डॉ जैन्सन गिल का कहना है,कि ऐसा अक्सर क्रिसमस के दौरान हो रही पार्टियों के कारण भी हो सकता है । यदि आप इस दौरान रात को नियमित रूप से भोजन लेने के बाद टहलते हैं, तो आपकी खून में जमा अतिरिक्त चर्बी की मात्रा नियंत्रित रहती है। इन विशेषज्ञों का मानना है, कि वसा हमारे शरीर के लिए एक आवश्यक तत्व  है ,लेकिन इसकी खून में आ रही अतिरिक्त मात्रा हमारे हृदय सहित रक्तचाप के नियंत्रण को बिगाड़ सकती है इन्हें कारणों  से आयुर्वेद के आचार्यों ने घी और तेल के नियंत्रित मात्रा में सेवन को आवश्यक  बताया है,बस ध्यान रहे की आपके शरीर में आ रही अतिरिक्त चर्बी को टहलने या नियमित व्यायाम के द्वारा जलाया जा सके।  

Thursday, 22 December 2011

ये हैं बढ़े हुए प्रोस्टेट की समस्या को मिटाने वाले कुछ कुदरती नुस्खे

यदि आपकी उम्र पचास को पार कर गयी है ,तो आपको प्रोस्टेट की समस्या से दो-चार होना पड़ सकता है। चिकित्सा जगत में इसे बिनायन प्रोस्टेट हायपरप्लेसीया कहा जाता है। इसमें पेशाब की धीरे का रुक-रुक कर आना,रात में बार-बार पेशाब जाना और पेशाब को न रोक पाना जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। हम आपको एक ऐसा उपाय बताते हैं ,जिससे आपको इस समस्या से राहत मिल पायेगी।

अश्विनी मुद्रा : लंबी सांस खींचकर रोकें। ठुड्डी  को नीचे झुकाकर छाती से लगाएं। अपने गुदा द्वार को सिकोड़ें। जितनी देर कर सकें, करें। फि र सांस छोड़ते हुए नार्मल अवस्था में आएं। गर्दन सीधी कर लें।  इसका नियमित अभ्यास करें साथ ही निम्न योग औषधि को भी लें आपको निश्चित लाभ मिलेगा।

- काली तुलसी के जड़ का चूर्ण - 3 ग्राम , मक्का की जटा की भस्म - 3 ग्राम, प्रात: सायं गाय के दूध साथ 2 से 3  माह दें और लाभ देखें। 

- 3-4 लिटर पानी पीने की आदत डालें। लेकिन शाम को 6 बजे बाद जरुरत मुताबिक ही पानी पीएं ताकि रात को बार बार पेशाब के लिये न उठना पडे।

-  सोयाबीन में फायटोएस्टोजीन्स होते हैं जो शरीर मे टेस्टोस्टरोन का लेविल कम करते हैं। रोज 30 ग्राम सोयाबीन के बीज गलाकर खाना लाभदायक उपचार है।

-  विटामिन सी का प्रयोग रक्त नलियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिये जरूरी है। 500 एम जी की 3 गोली प्रतिदिन लेना हितकर माना गया है। 

- अलसी को मिक्सर में चलाकर पावडर बनालें । यह पावडर 20 ग्राम की मात्रा में पानी में घोलकर दिन में दो बार पीयें। बहुत लभदायक उपचार है।

-  कद्दू में जिन्क पाया जाता है जो इस रोग में लाभदायक है। कद्दू के बीज की गिरी निकालकर तवे पर सेक लें। इसे मिक्सर में पीसकर पावडर बनालें। यह चूर्ण 20 से 30 ग्राम की मात्रा में नित्य पानी के साथ लेने से प्रोस्टेट सिकुडकर मूत्र खुलासा होने लगता है।

- चर्बीयुक्त पदार्थों का सेवन बंद कर दें। मांस खाने से भी परहेज करें।

- हर साल प्रोस्टेट की जांच कराते रहें ताकि रोग को प्रारंभिक हालत में ही पकडा जा सके।

- चाय और काफी में केफिन तत्व पाया जाता है। केफिन मूत्राशय की ग्रीवा को कठोर करता है और प्रोस्टेट रोगी की तकलीफ बढा देता है। इसलिये केफिन तत्व वाली चीजें इस्तेमाल न करें।

Wednesday, 21 December 2011

सोलह मिनट में बिना दवा के जुकाम और खांसी हो जाएगी गायब


आप खांसी के लिए दवाइयां ले कर थक चूके हैं। लंबे समय से आपको खांसी या जुकाम बना हुआ है। कफ आपका पीछा नहीं छोड़ रहा तो नीचे लिखा सोलह मिनट का प्रयोग अपनाकर आप खांसी व जुकाम से बिना दवा के छुटकारा पा सकते हैं।

अंगुष्ट मुद्रा- अंगुष्ट मुद्रा को लिंग मुद्रा भी कहा जाता है। अंगुष्ट पौरुष का प्रतीक है। व्यक्ति में सक्रियता के विकास के लिए इससे सहयोग मिलता है। अंगुष्ट मुद्रा से उष्णता बढ़ती है। पित्त प्रवृति वाले साधक को इस मुद्रा का प्रयोग अधिकारी व्यक्ति के निर्देश अनुसार ही करना चाहिए। अन्यथा पित्त का प्रकोप बढऩे से शरीर में अम्लता बढ़ सकती है। फिर उष्णता के कारण ये सब व्याधियां, दर्द होना, चक्कर आना, कंठ सुखना, शरीर में जलन, होना बढ़ सकती है। सर्दी के  मौसम में इस मुद्रा का उपयोग किया जा सकता है। इससे कफ दोष दूर होते हैं। पुरानी जुकाम भी सरलता से दूर होता है। शरीर में अनावश्यक चर्बी को भी जला देते हैं। जिससे मोटापे में कमी आती है।

विधि- अंगुष्ट मुद्रा बनाने के लिए दोनों हथेलियों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर बाएं अंगूठे को सीधा रखकर हथेलियों को परस्पर एक-दूसरे में दबाना होता है। अंगुलियों से भी पृष्ठ भाग पर दबाव देना है। दाहिने अंगूठे को बाएं अंगूठे के मूल में रखकर दबाव देना है। पहली बार बाएं अंगूठे को सीधा रखा जाए। दूसरी बार दाहिने अंगूठे से बाएं अंगूठे के मूल पर दबाव देना है। दोनो प्रकार से ही अंगुठे की यह मुद्रा बनाई जा सकती है।

 आसन- पद्मासन या अद्र्धपद्मासन लिंग मुद्रा में उपयोगी है। इन आसनों में जिन्हे अभ्यास न हो सके, वे सुखासन व वज्रासन में भी मुद्रा का उपयोग कर सकते हैं।

समय- अंगुष्ट मुद्रा का प्रयोग सुबह और शीतल रात्रि में किया जा सकता है। दिनभर में सोलह-सोलह मिनट तक तीन बार में प्रयोग किया जा सकता है।

परिणाम- खांसी शांत होती है।

- दमा व जुकाम का नाश होता है।

- साइनस व लकवा ठीक हो जाता है।

सावधानियां- पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति इसे अधिक न करें। पेट में जिनके अल्सर हो वे भी इसे न करें।

पानी पीते समय ये बातें याद रखें तो बीमारियां आपसे कौसो दूर रहें

पानी मनुष्य को भगवान के दिए सबसे अनमोल तोहफों में से एक है। स्वस्थ शरीर के लिए एक दिन में कम से कम 4 से 5 लीटर पानी पीना चाहिए। माना जाता है कि जो लोग पानी कम पीते हैं उन्हें कई तरह की बीमारियां हो सकती है।

ध्यान रखें कि आपका आधा पेट भोजन से एक चौथाई भाग पानी से और शेष 25 फीसदी भाग हवा से भरा होना चाहिए। पानी हमारे जीवन और सही स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसीलिए पानी पीते समय यदि कुछ बातों को ध्यान रखें तो बीमारियां आपसे दूर ही रहेंगी।

- सुबह उठकर खाली पेट अपनी क्षमता अनुसार 1-2 गिलास पानी पीना स्वास्थ्य के लिये बेहद फायदेमंद रहता है।

- कभी खड़े होकर न पीएं।

- बाहर का पानी पीने से यथा संभव बचें।

- जल से जहां हमारे शरीर के दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते हैं वहीं यह हमारे चेहरे की कांति बनाए रखता है।

- अशुद्ध पानी से लीवर और गुर्दों का रोग हो जाता है इन दोनों में इंफेक्शन हुआ तो इसका असर दिल पर भी पड़ता है।

- लगभग 70 प्रतिशत रोग जल की अशुद्धता से ही होते हैं। तो जल को जीवन में महत्व दें।

- पानी  पीते वक्त सावधानी रखेंगे तो भोजन और प्राण में इसका भरपूर लाभ मिलेगा।

- भोजन से पहले और तत्काल बाद में 1-2 घूंट से अधिक पानी न पीएं, क्योंकि ऐसा करने से भोजन के पचने में कठिनाई पैदा होती है।

घर पर बनाएं ये आयुर्वेदिक दवा, कहें पेट के सारे रोगों को बाय-बाय!

आजकल व्यस्त दिनचर्या के कारण अधिकतर लोगों के पास अपनी सेहत का ध्यान रखने का समय ही नहीं है। आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में अधिकांश बीमारियों का कारण पेट के रोग होते हैं और पेट रोग का प्रमुख कारण कब्ज है। अगर आप भी कब्ज और उससे होने वाली अन्य समस्याओं से ग्रस्त हैं तो घर पर ही करें अपनी कब्ज का इलाज इस आयुर्वेदिक दवा से।

सामग्री- छोटी काली हरड़ 250 ग्राम। इसे पानी में डाले। जो हरड़ पानी में डूब जाएं उसे लेना है। जो ऊपर तैरते रहे उसे फेंक देना चाहिए। डूबी हुई हरड़ को पानी से निकाल लें। एक ग्लास खट्टी छाछ में दो नींबू का छना हुआ रस डाल दें। फिर 10 ग्राम पीसा सेंधा नमक डाल कर हरड़ डाल दें और 48 घंटे तक ढाक कर रखें। बाद में हरड़ निकाल कर धूप में सुखा कर कूट पीस कर महीन चूर्ण कर लें। 

इस चूर्ण को 1 कप गरम पानी के साथ एक चम्मच रात को सोते समय लें। यदि कब्ज ज्यादा हो तो चूर्ण और पानी की मात्रा आवश्यकता के अनुसार बढ़ा लें। इस प्रयोग को साल भर तक यानी हमेशा रात को सोते समय लेते रहें। कोई भी हानि नहीं होगी। हरड़ का प्रयोग उन लोगों के लिए एक वरदान ही है जो हमेशा कब्ज के शिकार बने रहते हैं। जिन्हें न खुलकर भूख लगती है और न दोनों वक्त ठीक से शौच होता है। यह पाचन शक्ति ठीक रखने, गैस बनना, पेट साफ रखने, भूख बढ़ाने और समस्त उदर रोगों को दूर रखने वाला श्रेष्ठ और बहुत गुणकारी योग है। जो ऊपर बताएं फार्मुले का प्रयोग न भी करे और केवल हरड़ का ही उपयोग करें क्योंकि हरड़ के सेवन के भी कई लाभ हैं

गर्भ नहीं ठहरता हो तो सौंफ को खाएं इस तरह

गर्भधारण करने के बाद महिला को सौंफ और गुलकन्द मिलाकर पानी के साथ पीसकर हर रोज नियमित रूप से पिलाने से गर्भपात की आशंका समाप्त हो जाती ह...