o प्रजनन अंगो की अल्पक्रियता, अन्डग्रन्थि दौबल्र्य एवं शुक्रजनन नलिका के अपजनन आदि ही पुरूष बाँझपन के प्रमुख कारण है। शुक्रवाहिनी नलिका का अवरोध जन्मजात भी हो सकता है तथा पूयमेह (गोनोरिया) व मम्मपस एवं वृषण के राजयक्ष्मा के कारण भी हो सकता है। जन्मजात कारण में अन्डों का अत्यन्त छोटा होना भी सम्मिलित है। ‘एन्ड्रोजन‘ नामक पुरूष ‘हार्मोन‘ का उत्पादन कम होना या शुक्राणुओं का उत्पादन करने वाले अथवा शुक्राणुओं को बहाने वाले स्त्रोतों की विकृति भी पुरूष बांझपन के प्रमुख कारणों में से है। शुक्रकीट मृत होने से या अल्पमात्रा में होने से भी गर्भाधान नही होता हैं।
· शुक्रकीट अल्पता, व निष्क्रयता में अन्ड-ग्रन्थि की रूग्णता व अनुपस्थिति, शुक्रवाहिनी व पौरूष ग्रन्थि की रूग्णता व अनुपस्थिति, अत्यधिक मैथुन तथा शुक्रवाहिनी व पौरूष ग्रन्थि की जीर्णशोथ या आघात व शल्य कर्मजन्य विकृतियां भी पुरूष बांझपन के कारणों में सहायक होती है।
· उपचार:- बसन्त कुसुमाकर रस 1 गोली, अमृतासत्व, स्वर्णबंग (प्रत्येक-2-2 रत्ती) शतावर्यादि चूर्ण 1 माशा की (एक मात्रा) दिन में दो बार सुबह-शाम दूध से सेवन करने पर चालीस दिन में शुक्राणुओं की वृद्धि हो जाती है।
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