Friday, 1 April 2011

औषधीय गुणों से भरपूर घीया

कुछ सब्जियां प्रकृति की तरफ से फल के रूप में हम सबको मिलती है। घीया सभी सब्जियों से सस्ती मानी जाती है। यह बेल पर पैदा होती है और कुछ ही समय में काफी बड़ी हो जाती है। घीया को लौकी के नाम से जाना जाता है। वास्तव में यह एक औषधि है और इसका उपयोग हजारों रोगियों पर सलाद के रूप में अथवा रस निकालकर या सब्जी के रूप में एक लंबे समय से किया जाता रहा है। लंबी तथा गोल दोनों प्रकार की घीया वीर्यवर्ध्दक, पित्त तथा कफनाशक और धातु को पुष्ट करने वाली होती है।

घीया को कच्चा भी खाया जा सकता है। कच्ची घीया अथवा उसका रस पेट साफ करता है और शरीर को शुध्द एवं स्वस्थ बनाती है। वाग्भट्ट ने इसे तरबूज, खरबूजा, ककड़ी तथा खीरे के परिवार में रखा है। दरअसल ये सभी फल कफ तथा वायु को दूर करते हैं और शरीर से मल निकालते हैं तथा खाने में मीठे होते हैं। 100 ग्राम लौकी के रस में निम्नलिखित तत्व पाए जाते हैं :- पानी 96.1 ग्राम, प्रोटीन 0.2 ग्राम, वसा 0.1 ग्राम, रेशा 0.6 ग्राम, कार्बोज 2.5 ग्राम, कैल्शियम 20 मि.ग्रा., फास्फोरस 10 मि.ग्रा., लौहतत्व 0.5 मि.ग्रा., थायेमीन 0.03 मि.ग्रा., रिबोफ्लेविन 0.01 मि.ग्रा., नियासिन 0.2 मि.ग्रा., खनिज लवण 0.5 प्रतिशत, ऊर्जा 12 कि. कैलोरी।
घीया का प्रयोग आंतों की कमजोरी, कब्ज, पीलिया, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, आंत आमाशय या यकृत की सृजन, शरीर में जलन, मानसिक उत्तेजना, लकवा, संधिवात, स्ायु रोग आदि में बहुत उपयोगी है। आइए, डालें घीया के औषधीय गुणों पर एक नजर :-
1) हैजा होने पर 25 मि.ली. घीया के रस में आधा नींबू का रस मिलाकर धीरे-धीरे पीएं। इससे मूत्र बहुत आता है।
2) खांसी, टी.बी., सीने में जलन आदि में भी घीया बहुत उपयोगी है।
3) हृदय रोग में, विशेषकर भोजन के पश्चात् एक कप घीया के रस में थोड़ी सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हृदय रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
4) पुराना बुखार तथा कफ से पैदा होने वाले रोगों में यह उत्तम औषधि है।
5) घीया में श्रेष्ठ किस्म का पोटेशियम प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिसकी वजह से यह गुर्दे के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे पेशाब खुलकर आता है।
6) घीया श्लेषमा रहित आहार है। इसमें खनिज लवण अच्छी मात्रा में मिलती है।
7) लौकी के बीज का तेल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है तथा हृदय को शक्ति देता है। यह रक्त की नाड़ियों को भी स्वस्थ बनाता है।

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