Sunday, 6 August 2017
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Sunday, 30 July 2017
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Friday, 28 July 2017
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Tuesday, 25 July 2017
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Sunday, 23 July 2017
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Monday, 30 May 2016
औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं फूल (herbal Beauty health tips flower)
औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं फूल
डॉ दीपक आचार्य
फूलों की बात की जाए तो सिर्फ साज सज्जा और पूजन के बारे में ही खयाल आता है लेकिन फल औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं, इस सप्ताह हमारे पाठकों को कुछ खास फूलों के बारे में बताना चाहता हूं ताकि इनके औषधीय गुणों की समझ बन पाए-
गेंदे के फूल
आदिवासियों का मानना है कि जिन पुरुषों को स्पर्मेटोरिया (पेशाब और मल करते समय वीर्य जाने की शिकायत) हो उन्हे गेंदा के फूलों का रस पीना चाहिए। यदि गेंदा के फूलों को सुखा लिया जाए और इसके बीजों को एकत्र कर मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन कुछ समय तक दिन में दो बार किया जाए तो यह पुरुषों को शक्ति और प्रदान करता है। गेंदे के फूल की पंखुड़ियों को एकत्र कर पीस लिया जाए और शरीर के सूजन वाले हिस्सों में लगाया जाए तो सूजन मिट जाती है। गेंदा के फूलों को नारियल तेल के साथ मिलाकर कुचल लिया जाए और हल्की-हल्की मालिश करके नहा लिया जाए, सिर में हुए किसी भी तरह के संक्रमण, फोड़े-फुन्सियों में आराम मिल जाता है। जिन्हें सिर में फोड़े-फुन्सियां और घाव हो जाए उन्हे मैदा के साथ गेंदा की पत्तियों और फूलों के रस को मिलाकर सप्ताह में दो बार सिर पर लगाना चाहिए, आराम मिल जाता है। डाँग गुजरात के आदिवासियों के अनुसार यदि गेंदा के फूलों को सुखा कर और इसके बीजों को मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन तीन दिन तक किया जाए तो जिन्हें दमा और खांसी की शिकायत है, उन्हें काफी फायदा होता है।
अनार के फूल
आदिवासियों की मान्यता के अनुसार जिन महिलाओं को मातृत्व प्राप्ति की इच्छा हो, अनार की कलियां उनके लिए वरदान की तरह है। इन आदिवासियों के अनुसार अनार की ताजी, कोमल कलियां पीसकर पानी में मिलाकर, छानकर पीने से महिलाओं में गर्भधारण की क्षमता में वृद्धि होती है। लगभग 10 ग्राम अनार के फूलों को आधा लीटर पानी में उबालें, जब यह एक चौथाई शेष बचे तो इस काढ़े से कल्ले करने से मुंह के छालों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार अनार के फूल छाया में सुखाकर बारीक पीस लिए जाए और इसे मंजन की तरह दिन में 2 से 3 बार इस्तेमाल किया जाए तो दांतों से खून आना बंद होकर दांत मजबूत हो जाते हैं। डाँग, गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार अनार के फूलों को पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन अतिशीघ्र कम हो जाती है और दर्द में भी आराम मिलता है।
गुड़हल के फूल
गुड़हल के ताजे लाल फूलों को हथेली में कुचल लिया जाए और इस रस को नहाने के दौरान बालों पर हल्का-हल्का रगड़ा जाए, गुड़हल एक बेहतरीन कंडीशनर की तरह कार्य करता है। गुड़हल के लाल फूलों को नारियल तेल में डालकर गर्म करते हैं और बालों पर इस तेल से मालिश की जाती है। नहाते वक्त बालों पर इस तेल को लगाया जाए और नहाने के बाद बालों को आहिस्ता-आहिस्ता सूती तौलिये से सुखा लिया जाए और नहाने के बाद भी इस तेल को बालों पर लगाया जाए काफी तेजी से बालों की सेहत में सुधार आता है। गुड़हल के फूलों को चबाया जाए तो यह स्फूर्तिदायक होता है और माना जाता है कि यह पौरूषत्व को बढ़ावा देता है। फूलों के तिल के तेल में गर्म करके लगाने से बालों का झडऩा बंद हो जाता है और आदिवासी मानते है कि यह बालों का रंग भी काला कर देता है।
केले के फूल
केले के फूल टाइप-1 डायबिटीज के रोगियों के लिए कारगर उपाय है। अनेक शोधों के जरिए यह निष्कर्ष निकाला गया है कि फूल का रस तैयार करके टाइप-1 डायबिटीज रोगियों को दिया जाए तो यह रक्त में शर्करा की मात्रा कम करने में मदद करता है। कई रसायनिक और कृत्रिम दवाओं के सेवन के बाद अक्सर मुंह में छाले आने की शिकायत होती है। कच्चे केले और केले के फूलों को सुखाकर चूर्ण तैयार कर लिया जाए और इस चूर्ण की थोड़ी सी मात्रा छालों पर लगाई जाए तो छालों में अतिशीघ्र आराम मिलता है। आधुनिक शोधों से पता चलता है कि कच्चे केले और केले के फूल में एक महत्वपूर्ण फ्लेवोनोईड रसायन ल्युकोसायनिडिन पाया जाता है जो छालों के ठीक करने में सक्षम होता है। कई क्लिनिकल स्टडीज से यह भी ज्ञात हुआ है कि केले के फूल और पत्तियां त्वचा पर होने वाले अनेक सूक्ष्मजीवी खतरनाक संक्रमण को रोकने के लिए कारगर साबित हुई हैं। इनका रस अनेक तरह के त्वचा विकारों को दूर करने में सक्षम है।
http://www.gaonconnection.com
डॉ दीपक आचार्य
फूलों की बात की जाए तो सिर्फ साज सज्जा और पूजन के बारे में ही खयाल आता है लेकिन फल औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं, इस सप्ताह हमारे पाठकों को कुछ खास फूलों के बारे में बताना चाहता हूं ताकि इनके औषधीय गुणों की समझ बन पाए-
गेंदे के फूल
आदिवासियों का मानना है कि जिन पुरुषों को स्पर्मेटोरिया (पेशाब और मल करते समय वीर्य जाने की शिकायत) हो उन्हे गेंदा के फूलों का रस पीना चाहिए। यदि गेंदा के फूलों को सुखा लिया जाए और इसके बीजों को एकत्र कर मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन कुछ समय तक दिन में दो बार किया जाए तो यह पुरुषों को शक्ति और प्रदान करता है। गेंदे के फूल की पंखुड़ियों को एकत्र कर पीस लिया जाए और शरीर के सूजन वाले हिस्सों में लगाया जाए तो सूजन मिट जाती है। गेंदा के फूलों को नारियल तेल के साथ मिलाकर कुचल लिया जाए और हल्की-हल्की मालिश करके नहा लिया जाए, सिर में हुए किसी भी तरह के संक्रमण, फोड़े-फुन्सियों में आराम मिल जाता है। जिन्हें सिर में फोड़े-फुन्सियां और घाव हो जाए उन्हे मैदा के साथ गेंदा की पत्तियों और फूलों के रस को मिलाकर सप्ताह में दो बार सिर पर लगाना चाहिए, आराम मिल जाता है। डाँग गुजरात के आदिवासियों के अनुसार यदि गेंदा के फूलों को सुखा कर और इसके बीजों को मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन तीन दिन तक किया जाए तो जिन्हें दमा और खांसी की शिकायत है, उन्हें काफी फायदा होता है।
अनार के फूल
आदिवासियों की मान्यता के अनुसार जिन महिलाओं को मातृत्व प्राप्ति की इच्छा हो, अनार की कलियां उनके लिए वरदान की तरह है। इन आदिवासियों के अनुसार अनार की ताजी, कोमल कलियां पीसकर पानी में मिलाकर, छानकर पीने से महिलाओं में गर्भधारण की क्षमता में वृद्धि होती है। लगभग 10 ग्राम अनार के फूलों को आधा लीटर पानी में उबालें, जब यह एक चौथाई शेष बचे तो इस काढ़े से कल्ले करने से मुंह के छालों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार अनार के फूल छाया में सुखाकर बारीक पीस लिए जाए और इसे मंजन की तरह दिन में 2 से 3 बार इस्तेमाल किया जाए तो दांतों से खून आना बंद होकर दांत मजबूत हो जाते हैं। डाँग, गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार अनार के फूलों को पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन अतिशीघ्र कम हो जाती है और दर्द में भी आराम मिलता है।
गुड़हल के फूल
गुड़हल के ताजे लाल फूलों को हथेली में कुचल लिया जाए और इस रस को नहाने के दौरान बालों पर हल्का-हल्का रगड़ा जाए, गुड़हल एक बेहतरीन कंडीशनर की तरह कार्य करता है। गुड़हल के लाल फूलों को नारियल तेल में डालकर गर्म करते हैं और बालों पर इस तेल से मालिश की जाती है। नहाते वक्त बालों पर इस तेल को लगाया जाए और नहाने के बाद बालों को आहिस्ता-आहिस्ता सूती तौलिये से सुखा लिया जाए और नहाने के बाद भी इस तेल को बालों पर लगाया जाए काफी तेजी से बालों की सेहत में सुधार आता है। गुड़हल के फूलों को चबाया जाए तो यह स्फूर्तिदायक होता है और माना जाता है कि यह पौरूषत्व को बढ़ावा देता है। फूलों के तिल के तेल में गर्म करके लगाने से बालों का झडऩा बंद हो जाता है और आदिवासी मानते है कि यह बालों का रंग भी काला कर देता है।
केले के फूल
केले के फूल टाइप-1 डायबिटीज के रोगियों के लिए कारगर उपाय है। अनेक शोधों के जरिए यह निष्कर्ष निकाला गया है कि फूल का रस तैयार करके टाइप-1 डायबिटीज रोगियों को दिया जाए तो यह रक्त में शर्करा की मात्रा कम करने में मदद करता है। कई रसायनिक और कृत्रिम दवाओं के सेवन के बाद अक्सर मुंह में छाले आने की शिकायत होती है। कच्चे केले और केले के फूलों को सुखाकर चूर्ण तैयार कर लिया जाए और इस चूर्ण की थोड़ी सी मात्रा छालों पर लगाई जाए तो छालों में अतिशीघ्र आराम मिलता है। आधुनिक शोधों से पता चलता है कि कच्चे केले और केले के फूल में एक महत्वपूर्ण फ्लेवोनोईड रसायन ल्युकोसायनिडिन पाया जाता है जो छालों के ठीक करने में सक्षम होता है। कई क्लिनिकल स्टडीज से यह भी ज्ञात हुआ है कि केले के फूल और पत्तियां त्वचा पर होने वाले अनेक सूक्ष्मजीवी खतरनाक संक्रमण को रोकने के लिए कारगर साबित हुई हैं। इनका रस अनेक तरह के त्वचा विकारों को दूर करने में सक्षम है।
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गर्मियों में सौंदर्य के लिए इन्हें आजमाएं herbal Beauty health tips
गर्मियों में सौंदर्य के लिए इन्हें आजमाएं
डॉ दीपक आचार्य
सौंदर्य प्रसाधन के तौर पर जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल को सदियों से सराहा गया है और परंपरागत रूप से अनेक हर्बल-नुस्खों के जरिए कई तरह के सौंदर्य प्रसाधनों को तैयार कर हम सब अपनी सेहत की सुरक्षा बेहतर तरीके से कर सकते हैं। तपतपाती गर्मी के आने की खनक हो चुकी है और इन गर्मियों में त्वचा का झुलसना, बेरंग होना और सन टैन जैसी समस्याएं आपका इंतज़ार करेंगी। घातक कृत्रिम रसायनोंयुक्त दवाओं और क्रीम की तरफ कूच करने के बजाए इस सीजन में जरा इन देशी नुस्खों को आजमाकर देखें। हवा में तैरते हुए प्रदूषक कणों और तपतपाती धूप की मार चेहरे की त्वचा को झुलसा के रख देती है और यह चेहरे पर झुर्रियां बनने की वजहें बन सकती है लेकिन कुछ पारंपरिक हर्बल नुस्खों को अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है।
सेब को कुचल लिया जाए और इसमें कुछ मात्रा कच्चे दूध की मिलाकर चेहरे पर लगाया जाए। इसके सूखने पर चेहरा धो लें। सप्ताह में कम से कम चार बार ऐसा करने से काफी फायदा होता है।
दो टमाटर को लेकर कुचला जाए और इसमें तीन चम्मच दही और दो चम्मच जौ का आटा मिला दिया जाए। चेहरे पर इस मिश्रण को कम से कम 20 मिनट के लिए लगाकर रखा जाए तो यह त्वचा के सिकुड़न में मदद करता है जिससे झुर्रियां कम होने लगती हैं और यह धूप की मार भी कम करता है। इस उपाय को सप्ताह में 2 बार कम से कम एक माह तक उपयोग में लाना चाहिए, फायदा होता है।
रात सोने जाने से पहले संतरे के दो चम्मच रस में दो चम्मच शहद मिलाकर चेहरे पर 20 मिनट तक लगाए रखना चाहिए। बाद में साफ कपास को दूध में डुबोकर चेहरे की सफाई करनी चाहिए। ऐसा प्रतिदिन करा जाए तो सकारात्मक परिणाम जल्द ही दिखने लगते हैं।
पारंपरिक हर्बल वैद्यों की जानकारी के अनुसार 1/2 कप पत्ता गोभी का रस तैयार किया जाए और इसमें आधा चम्मच दही और एक चम्मच शहद मिलाकर चेहरे पर लगाया जाए। जब यह सूख जाए तो गुनगुने पानी से इसे धो लिया जाए। ऐसा करने से चेहरे की त्वचा में प्राकृतिक रूप से खिंचाव आता है और यह झुर्रियों को दूर करने में मदद करता है।
चावल के आटे में थोड़ा सा दूध और गुलाब जल मिलाकर पेस्ट तैयार कर लिया जाए और चेहरे पर हल्का-हल्का मालिश किया जाए। कुछ देर बाद इसे गुनगुने पानी से साफ भी कर लिया जाए। सप्ताह में कम से कम तीन बार इस प्रक्रिया को दोहराने से सन टैन होने पर काफी फर्क महसूस किया जा सकता है।
केला त्वचा के लिए एक अच्छा नमी कारक (मॉइश्चराइज़र) उपाय है। पके हुए केले को अच्छी तरह से मैश कर लिया जाए और चेहरे पर फेसपैक की तरह लगा दिया जाए, करीब 15 मिनट बाद इसे धो लिया जाए। चेहरा धुल जाने के बाद रक्त चंदन का लेप भी लगाया जाए, माना जाता है कि ऐसा करने से चेहरे की त्वचा में जबरदस्त निखार आता है और लू के थपेड़ों का असर कम हो जाता है।
पान के एक पत्ते को कुचल लिया जाए और इसमें एक चम्मच नारियल का तेल मिला लिया जाए। इसे चेहरे या शरीर के किसी भी हिस्से पर धूप की वजह से बने दाग, काले निशान या धब्बों पर लगाकर कुछ देर रखा जाए और फिर धो लिया जाए। ऐसा सप्ताह में कम से कम 2 से 3 बार किया जाए तो तीन महीने के भीतर निशान मिट सकते हैं।
एक आलू को बारीक पीस लिया जाए और इसमें 2-3 चम्मच कच्चा दूध मिला लिया जाए ताकि पेस्ट तैयार हो जाए। इस पेस्ट को प्रतिदिन सुबह शाम कुछ देर के लिए काले निशानों पर लगाकर रखा जाए और फिर धो लिया जाए, शीघ्र ही निशान दूर हो जाएंगे।
कुन्दरू के फलों में कैरोटीन प्रचुरता से पाया जाता है जो विटामिन ए का दूत कहलाता है। कुन्दरू में कैरोटीन के अलावा प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व भी पाए जाते हैं। गुजरात के डाँगी आदिवासियों के बीच कुंदरू की सब्जी बड़ी प्रचलित है। इन आदिवासियों के अनुसार इस फल की अधकच्ची सब्जी लगातार कुछ दिनों तक खाने से आंखों की रोशनी बेहतर होती है। त्वचा की चमक और तेजपन बनाए रखने के लिए 2-3 कच्चे कुंदरुओं को प्रतिदिन चबाना लाभदायक होता है।
औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है। गर्मियों में घमौरियों के इलाज के लिए डाँग- गुजरात के आदिवासी संतरे के छिलकों को छाँव में सुखाकर पाउडर बना लेते है और इसमें थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाबजल मिलाकर शरीर पर लगाते है, ऐसा करने से तुरंत आराम मिलता है।
चेहरे की त्वचा को साफ पानी से धो लिया जाए और इस पर कपास की मदद से नींबू का रस लगाया जाए तो चेहरे के छिद्रों पर तेल और मृत कोशिकाओं के जमावड़े को हटाया जा सकता है और त्वचा खूबसूरत भी दिखाई देती है।
कुछ आदिवासी हर्बल जानकार चेहरे पर गर्म पानी की भाप लेने की सलाह देते हैं। इनके अनुसार एक चौड़े बर्तन में गर्म खौलता पानी डाल दिया जाए और पूरे सिर पर तौलिया डालकर खौलते पानी से निकल रही भाप को चेहरे के संपर्क में लाया जाए जिससे छिद्रों में उपस्थित गंदगी और तेल बाहर निकल आते है। कुछ देर बाद चेहरे पर कपास को हल्का-हल्का रगड़कर चेहरा साफ़ कर लिया जाए और फिर चेहरे पर नींबू रस लगाया जाए। ऐसा सप्ताह में सिर्फ़ एक बार किया जाना काफी है। मुहांसे ठीक हो जाते है और चेहरे से दाग-धब्बे भी मिट जाते हैं।
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